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पीसा की मीनार को चुनौती
अभी तक हम यही जानते-मानते थे कि पीसा की मीनार दुनिया में सबसे झुकी हुई मीनार है। इसके लिए उसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज था। लेकिन अब यह रिकॉर्ड बदलने का समय आ गया है। गिनीज के अधिकारियों ने कहा है कि अब यह दर्जा जर्मनी में एक चर्च की मीनार को हासिल होने वाला है। गिनीज बुक के जर्मन संस्करण के प्रमुख ने कहा है कि चर्च की 25.7 मीटर ऊंची मीनार 5.07 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है, जबकि पीसा की मीनार महज 3.97 डिग्री के कोण पर झुकी है। अलग-अलग देखने पर शायद इस बात का अहसास न हो लेकिन अगर दोनों मीनारों की फोटो साथ-साथ रखी जाएं तो दोनों के कोण में अंतर को साफ देखा जा सकता है। नया रिकॉर्ड गिनीज बुक के 2009 के संस्करण में शामिल किया जाएगा।
तब पीसा की मीनार से जुड़ा वह दर्जा उससे छिन जाएगा जो दुनियाभर में उसकी पहचान न जाने कब से बना हुआ था। पंद्रहवीं सदी की जर्मन चर्च की यह मीनार उत्तर-पश्चिम जर्मनी में एमडेन के निकट एक छोटे से गांव सुरहसन में स्थित है। अब इस चर्च के झुके होने का कोण भले ही पीसा की मीनार से ज्यादा हो लेकिन उसकी ऊंचाई पीसा की मीनार की आधी भी नहीं और न ही उसमें पीसा जैसी कलात्मक खूबसूरती है।
सजा कहीं पर्यटन को न मिले
ग्लोबल वार्मिग को लेकर मचे कोलाहल में कहीं न कहीं पर्यटन उद्योग भी शामिल है। मौसम में हो रहे बदलाव में कहीं उसका योगदान है तो कहीं वह खुद उसका शिकार भी है। इसलिए पर्यटन उद्योग की दुहाई यही है कि कोई भी समाधान समस्या का निकाला जाए तो पर्यटन उद्योग को सजा न दी जाए। पर्यटन दुनिया के कई देशों की आर्थिक जीवनरेखा है। लिहाजा उस पर कोई भी पाबंदी करोड़ों लोगों के जीवन को संकट में डाल सकती है। लंदन में पर्यटन मंत्रियों की बैठक के बाद अगले महीने बाली में संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में पर्यावरण मंत्रियों की बैठक हो रही है। यहां कार्बन उत्सर्जन पर रोक के सिलसिले में अभी लागू क्योटो संधि के भविष्य को लेकर बात होगी। यह संधि 2012 में खत्म हो रही है। इसीके चलते यह चर्चा नए सिरे से उठ खड़ी हुई है। यूएन से जुड़े विश्व पर्यटन संगठन का मानना है कि पर्यटन दुनिया से गरीबी दूर करने में भी काफी मददगार है। लोग पर्यटन को ऐशो-आराम से जोड़कर देखते हैं, वे इसे एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि के रूप में नहीं देखते। विश्व पर्यटन संगठन इसी बात पर जोर देना चाहता है। इसीलिए उसका मानना है कि ग्लोबल वार्मिग पर किसी भी समाधान का हिस्सा इस क्षेत्र को भी बनाया जाना चाहिए।
मेडिकल टूरिज्म चढ़ेगा परवान
भारत में मेडिकल टूरिज्म को जल्द ही नया आयाम मिलने वाला है। राजधानी दिल्ली के नजदीक एक हजार बिस्तर वाले अस्पताल की एक योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि सैलानी परिवारों को इलाज मुहैया कराया जा सके। किफायती रिहाइश वाले इस अस्पताल के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय पार्टियों ने रुचि दिखाई है। अब यह प्रस्ताव योजना आयोग और प्रधानमंत्री के सामने रखा जाएगा। पर्यटन मंत्रालय का मानना है कि कई ऐसे मरीज हैं जो इलाज के लिए परिवारों समेत आते हैं और उनकी रुचि घूमने-फिरने में भी होती है। होटल ऐसे लोगों के लिए महंगा सौदा है। मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में 6.5 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई जा रही है। कुछ ही समय पहले तक भारतीय इलाज के लिए विदेश जाया करते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। देश में कुशल डॉक्टरों, आधुनिक तकनीकों व वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की उपलब्धता अब विदेश से सैलानियों को इलाज के लिए भारत बुला रही है। लेकिन जाहिर है कि इसके लिए एक उपयुक्त ढांचा खड़ा करना होगा। पर्यटन मंत्रालय को इस क्षेत्र में निजी निवेश से बहुत उम्मीदें हैं। अभी भले ही चीन मेडिकल टूरिज्म के ढांचे में भारत से आगे चल रहा हो लेकिन देर-सबेर भारत को भी इसमें अहम मुकाम हासिल हो जाएगा।
कश्मीर की नई वादियों की राहें
सुधरते हालात में कश्मीर में पर्यटन की कई नई राहें खुलने को हैं। अब तक कश्मीर घाटी में श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम, खिलनमर्ग, वगैरह जगहें ही सैलानियों को ज्यादा पता थीं। लेकिन कश्मीर के कई हिस्से ऐसे हैं जो अब तक सैलानियों के कदमों से अछूते हैं। राज्य के पर्यटन विभाग की निगाहें अब लोगों को उस तरफ ले जाने की है। इस क्रम में नियंत्रण रेखा के नजदीक बांगस घाटी में ढांचा खड़ा करने का काम किया जा रहा है। बांगस घाटी, गुरेज व तुलैल घाटी को मिलाकर एक नया टूरिस्ट सर्किट भी पेश करने की योजना बनाई जा रही है। बांगस घाटी दस हजार फुट की ऊंचाई पर लगभग तीन सौ वर्ग किलोमीटर इलाके में फैली हुई है। यहां सौ से ज्यादा बुग्याल हैं। यह इलाका वनस्पतियों व वन्यप्राणियों की कई अद्भुत प्रजातियों से भरा-पूरा माना जाता है। इस सर्किट को खोलने से पहले यहां पर्यटकों की सहूलियत के लिए गेस्ट हाउस, पर्यटन सूचना केंद्रों व अन्य सुविधाओं से जुड़ा बुनियादी ढांचा खड़ा करने की तैयारी है। श्रीनगर व गुलमर्ग जैसे पारंपरिक स्थानों पर भी नई चीजें जोड़ी जा रही है। यह सब होने के बाद कश्मीर को देश की पर्यटन मुख्यधारा में उसका खोया हुआ प्रमुख स्थान फिर से दिलाने में काफी मदद मिलेगी।
ब्रिटेन की पहली हाईस्पीड लाइन
हाईस्पीड ट्रेनों की रेस में अब ब्रिटेन भी शामिल हो गया है। यूरोस्टार ने लंदन से पेरिस की लाइन पर हाई-स्पीड सेवा की शुरुआत की है । यह ब्रिटेन की पहली हाई-स्पीड ट्रेन है । इससे लंदन से पेरिस और ब्रसेल्स जाने के समय में खासी बचत होती है । इसे ब्रिटेन में पिछले सौ सालों का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट कहा जा रहा है। ब्रिटेन में इसके लिए 109 किलोमीटर का हाईस्पीड ट्रैक बिछाया गया है। इसका चौथाई हिस्सा भूमिगत है। इससे मध्य लंदन से चलकर (इंग्लिश) चैनल टनल तक ट्रेन अपनी तीन सौ किलोमीटर की पूरी रफ्तार से दौड़ सकेगी। नई ट्रेन के चालू हो जाने के बाद लंदन से पेरिस के बीच लगने वाला 2 घंटे 35 मिनट का वक्त कम होकर 2 घंटे 15 मिनट रह गया । वहीं लंदन से ब्रसेल्स के सफर के लिए लगने वाला 2 घंटे 15 मिनट का समय कम होकर 1 घंटे 55 मिनट का रह गया । हाई-स्पीड ट्रेन की सेवाएं मध्य लंदन में नए बने सेंट पैनक्रास इंटरनेशनल स्टेशन से शुरू हुईहैं । अब तक यूरोस्टार की सेवाएं वाटरलू इंटरनेशनल स्टेशन से शुरू होती थीं। नया स्टेशन अपने आप में कारीगरी की मिसाल है खास तौर पर इसकी स्टील व शीशे से बनी गोलाकार विलियम बार्लो छत। यह स्टेशन जल्द ही मध्य लंदन में सैलानियों का नया अड्डा बनने वाला है।