इतिहास का एक पन्ना हैदराबाद

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आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में कदम रखते ही आपको एक ओर इतिहास की गलियों में घूमने का एहसास होगा और दूसरी तरफ तकनीकी ऊंचाइयों को छूती आधुनिकता आपको असमंजस में डाल देगी। नई-पुरानी संस्कृति के संगम के रूप में उभरता हैदराबाद सदियों से निजामों का प्रिय शहर और मोतियों के केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। आज के पर्यटक के लिए हैदराबाद में देखने के लिए इतना कुछ है कि आप तीन-चार दिन आराम से इसे देखने और इसकी उपलब्धियों को जानने में बिता सकते हैं। हैदराबाद इस शहर का यह नाम कैसे पड़ा इसके पीछे छिपी है एक प्रेम कहानी। शुरुआत में भाग्यनगर कहलाने वाले इस शहर का नाम बदल कर हैदराबाद इसलिए हुआ क्योंकि इब्राहिम कुतुबशाह के पुत्र मुहम्मद कुली का प्रेम मूसी नदी के पार छिछलम गांव की भागमती से हो गया। पिता ने पुत्र की इस प्रेमयात्रा को सरल बनाने के लिए नदी पर एक पुल बनाया। भागमती के साथ मुहम्मद कुली का निकाह होते ही भागमती का नाम हैदर महल रखा गया और भाग्यनगर का नाम बदल कर हैदराबाद कर दिया गया।

चारमिनार

हैदराबाद की शान और पर्याय के रूप में चारमिनार इस शहर का सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र है। मुहम्मद कुली ने अपनी बीवी के गांव की जगह इसका निर्माण 1591 में शुरू किया और इन चारों मीनारों को पूरा बनने में करीब 21 साल लगे।    जितने शौकीन यहां के निजाम थे, उनके मंत्री भी उतने ही कलाप्रेमी थे। सातवें निजाम के प्रधान मंत्री के रूप में नवाब मीर यूसुफ अली खान का शौक अद्भुत कलाकृतियों का संग्रह था। उनकी जुटाई कलाकृतियों व किताबों को बहुत सुंदर ढंग से सजाकर रखा गया है सालार जंग संग्रहालय में। हैदराबाद मुख्य शहर से करीब 10 किमी दूर पर गोलकोंडा किला इतिहास का एक ऐसा पन्ना है, जिसे बार-बार पढ़ने की इच्छा हर पर्यटक के मन में होती है। 800 साल पुराने इस किले के खंडहरों को देख कर स्थापत्य कला के प्रति कुतुबशाही वंश के राजाओं का रुझान स्पष्ट हो जाता है। इसमें आठ विशाल द्वार हैं। सात किमी की गोलाई में इस किले का निर्माण ग्रेनाइट से हुआ है। रानी महल के खंडहरों में शाही हमाम, मस्जिदों, मंदिरों व दीवाने आम के हॉलों का आज भी देखा जा सकता है। गोलकोंडा में अरब व अफ्रीका के देशों के साथ हीरे व मोतियों का व्यापार होता था। विश्व प्रसिद्ध हीरा कोहिनूर हीरा यहीं मिला था। यहां की बेशुमार दौलत ने ‘सिंदबाद’ व ‘हीरों की घाटी’ जैसी कहानियों को जन्म दिया है। पर्यटन विभाग इतिहास के रोमांच को जीवंत बनाने के लिए एक लाइट एंड साउंड कार्यक्रम भी यहां करता है।

हैदराबाद के निजामों की शानों-शौकत और कला के प्रति बेहद प्यार की एक झलक आपको आखिरी निजाम द्वारा बनवाए गए फलकनुमा महल में भी देखने को मिलेगी। 1884 में यह महल पूरी तरह तैयार हुआ और इसे बनने में 9 वर्ष लगे। यहां के कालीन, फर्नीचर, मूर्तियां तथा महल के अंदर की दीवारों पर की गई बेहद उम्दा नक्काशी और चित्रकारी देखने लायक हैं। इस निजाम का हीरों का संग्रह भी दुनिया के किसी एक व्यक्ति द्वारा किया गया सबसे बड़ा संग्रह माना जाता है। निजाम ने इस महल में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम व एडवर्ड आठवें का स्वागत किया था।

हिंदू व मुस्लिम संस्कृतियों का संगम

हिंदू व मुस्लिम संस्कृतियों का अद्भुत संगम देखना हो तो चारमिनार के आसपास के मशहूर बाजार पथरगट्टी व लाड बाजार में चले जाएं। वहां देशी-विदेशी महिलाएं आपको मोती के गहने और लाख की चूडि़यां खरीदती दिखेंगी। इस शहर के कई परिवार कई पीढि़यों से मोती के व्यापार से जुड़े हुए हैं। मोतियों को धागे में पिरोने का काम में हैदराबाद जैसी निपुणता कहीं नहीं है। कुतुबशाही मकबरे भी इस शहर की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों में है। यह दुनिया का अकेला ऐसा मकबरा है जहां पूरा कुतुबशाह वंश एक स्थान पर दफनाया गया है। हैदराबाद के मंदिर भी दर्शनीय हैं। इनमें संगमरमर से बना बिड़ला मंदिर खास है। इसकी ऊंचाई से हैदराबाद की सुंदर झलक दिखाई देती है। इसके अतिरिक्त वेंकटेश्वर मंदिर, आनंद बुद्ध विहार, मक्का मस्जिद आदि भी दर्शनीय हैं।

खान-पान

हैदराबाद की सैर करते-करते आपको यहां के मशहूर व्यंजनों की मदहोश करने वाली खुशबू शहर के किसी न किसी कोने से आपको जरूर मिल जाएगी और आप अपना रुख उसी ओर करते दिखाई देंगे। जी हां, हैदराबाद की कच्चे गोश्त की बिरयानी का नाम सुनते ही और खुशबू पाते ही खाने के शौकीन लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। कुछ लोग तो इस खास बिरयानी का जायका लेने खासतौर पर हैदराबाद जाते हैं। कच्चे गोश्त व चावल को धीमी आंच पर मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। कई तरह के खुशबूदार मसालों व केसर के केसरिया रंग से सजी बिरयानी आंध्र प्रदेश के व्यंजनों की सरताज है।

निजामों के इस शहर हैदराबाद में अन्य मुगलई व्यंजन भी हैं, जिनके जायके आपको यहीं मिलेंगे। हांडी का गोश्त भी मिट्टी की हांडी में रख कर बहुत धीमी आंच पर पकाया जाता है। काली मिर्च का मुर्ग भी लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है। हैदराबादी बिरयानी जैसे 5-6 किस्म की बनाई जाती है, उसी तरह यहां के लजीज कबाबों का भी जवाब नहीं। जाली के कबाब, सीक व शामी कबाबों का जायका लेने लोग दूर-दूर से यहां आते हैं और बिरयानी के साथ इन उम्दा कबाबों का पूरा लुत्फ उठाते हैं। मुगलई व्यंजनों के लिए मशहूर हैदराबाद में कई ऐसे नामी बावर्ची हैं जिनकी पुरानी पीढि़यों ने निजामों की रसोइयों में काम किया है।

गोश्त के साथ रुमाली या तंदूरी रोटी खाना आम है, पर खमीरी शीरमल के साथ गोश्त का मजा बिलकुल अलग होता है। खुशबूदार मसालों में बना भराग भी मुगलई व्यंजनों की सूची में शामिल है। आंध्र प्रदेश के तेज मिर्च व खट्टे स्वाद वाले व्यंजन अकसर अन्य प्रदेश के लोगों को अंगुली चाटने पर मजबूर कर देते है। तेज लाल मिर्च, नारियल व इमली का प्रयोग यहां खूब किया जाता है। पुलीहारा यहां की खास डिश है। जिसमें चावल राई का छौंक, इमली व हरी मिर्च डाली जाती है। शाकाहारी लोगों के लिए भी कई तरह के स्वाद हैं जिनमें इडली, डोसा, सांबर व नारियल की चटनी के साथ-साथ चूरन के करेले व बघारे बैंगन विशेष हैं। तिल व पिसी मूंगफली की ग्रेवी में बने चटपटे बघारे बैंगन सिर्फ आंध्र प्रदेश की खासियत हैं जिनमें छोटे-छोटे गोलाकार बैंगनों का प्रयोग किया जाता है। भोजन में पापड़ भुने हों या तले व विभिन्न प्रकार की चटनियों के स्वाद से हैदराबादी खाने का मजा दुगना हो जाता है। यहां भी भोजन का अंत मीठा खाकर ही होता है। सेवई, खीर या खुबानी का मीठा इनमें खास है।

कहां ठहरें

आईटीसी होटल काकतीय शेरेटन एंड टॉवर्स, ताज कृष्णा व रेसिडेंसी, होटल कम्फर्ट इन यहां के स्टार होटल हैं। इसके अलावा होटल चारमिनार, होटल पर्ल ऑर्फ द ओरियंट में भी ठहरा जा सकता है।

कैसे पहुंचे

भारत के प्रमुख शहरों से हैदराबाद के लिए नियमित उड़ानें हैं। सड़क मार्ग से भी यह पूरे देश से जुड़ा है। देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों से यह रेलमार्ग से भी जुड़ा है। दिल्ली से रेल से हैदराबाद पहुंचने में करीब 26 घंटे लगते हैं।

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